स्मार्ट सिटी की आड़ में हो रहा शौचालय घोटाला? करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी नहीं लेता कोई सुध

News24NCR/SandeepGathwal: स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 के लिए अच्छी रैंकिंग लाने के लिए नगर निगम ने सलाहकार एजेंसी तो नियुक्त कर ली और हर महीने लाखों रुपये उस पर बहाए भी जा रहे हैं लेकिन शहर में 292 शौचालय ऐसे भी हैं जिन्हें ठीक करने के लिए निगम के पास बजट नहीं है। पूरे फरीदाबाद में दो साल पहले स्वच्छ भारत मिशन के तहत एक प्राइवेट एजेंसी ने सीमेंट के रेडीमेड टॉयलेट बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए थे, लेकिन अब तक इनका इस्तेमाल लोग नहीं कर पाए हैं।

अब मार्च में स्वच्छ सर्वेक्षण भी शुरू होने वाला है ऐसे में अगर केंद्र सरकार की टीमें शहर का दौरा करेंगी तो उन्हें टूटे व गंदे शौचालय ही दिखाई देंगे। स्वच्छ भारत मिशन के तहत लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से ओल्ड फरीदाबाद में 102, एनआईटी जोन में 102 और बल्लभगढ़ में 88 प्री कास्ट सीमेंटेड टॉयलेट लगाए गए। लेकिन इनमें पानी व सफाई का इंतजाम नगर निगम ने नहीं किया। परिणाम ये निकला कि आज ये सभी टॉयलेट गंदे और टूटे हुए हैं। किसी का गेट गायब है तो किसी टॉयलेट की सीट पर गंदगी भरी हुई है।

प्री कास्ट सीमेंटेड टॉयलेट
2018 में नगर निगम ने शहर के कुछ महत्वपूर्ण जगहों को चिन्हित किया जहां पर ज्यादा पब्लिक का मूवमेंट होता है। इन जगहों पर पहले से ही तैयार किये गए टॉयलेट को लाकर फिक्स किया गया जिसे प्री कास्ट सीमेंटिड टॉयलेट कहा जाता है।

रियलिटी चेक में दिखा बुरा हाल
पत्रकारों कि एक टीम ने जब इन 292 शौचालयों की पड़ताल की तो ज्यादातर टूटे और गंदगी से भरे मिले। एनबीटी की टीम सेक्टर 20 बी में गई जहां पर स्लम बस्ती है वहां पर रखे गए टॉइलट के गेट ही गायब मिले। आसपास के लोगों से पूछा तो उन्होंने बताया कि जबसे ये टॉइलट यहां रखे गए हैं तब से लेकर अब तक इनमें पानी ही नहीं आया।

इसके बाद टीम कृष्णा कॉलोनी के अंदर गई। इस स्लम बस्ती के पास भी टॉइलट रखे गए थे लेकिन उनका भी काफी बुरा हाल था। ऐसा ही हाल हार्डवेयर से सोहना रोड की तरफ जाते वक्त मुजेसर गौंछी ड्रेन के पास रखे टॉइलट में देखने को मिला। गेट टूटे मिले और अंदर कचरा भरा मिला। ऐसे में लोग इन टॉयलेट का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं।

ओडीएफ सर्टिफिकेट भी हो चुका है कैंसल
नगर निगम अधिकारियों की इसी गलती की वजह से साल 2018 में नगर निगम का ओडीएफ सर्टिफिकेट केंद्र सरकार ने कैंसल कर दिया था। क्योंकि नगर निगम इलाके में बने टॉइलट की स्थिति काफी खराब थी। लोग आज भी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।

एजेंसी पर खर्च हो रहे साढ़े 7 लाख महीना
नगर निगम ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छ सर्वेक्षण में शहर को अच्छी रैंकिंग दिलाने के लिए साढ़े 7 लाख रुपये प्रति महीने के हिसाब से सलाहकार एजेंसी को नियुक्त किया है लेकिन अभी तक इस एजेंसी का फायदा नगर निगम को नहीं मिल पा रहा है। अगर यहीं पैसे इन टॉइलट पर खर्च किये जाएं तो लोगों को फायदा होगा और स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंकिंग भी सुधरेगी।