सावधान: भारतीय सेना के अधिकारी बताकर लोगों के बैंक खाते साफ कर रहे है साइबर ठग

  • ऑनलाइन शॉपिंग साइट पर वाहन खरीदने या बेचने का झांसा देकर करते हैं ठगी
  • सैन्य अधिकारी सुनकर लोग आसानी से आ जाते हैं झांसे में

News24NCR/Faridabad: लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए साइबर ठग नई-नई तिकड़म भिड़ा रहे हैं। इनमें एक तरीका खुद को सैन्य अधिकारी बताकर फंसाने का है। जिले में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें साइबर ठगों ने खुद को सैन्य अधिकारी बताया। लोग आसानी से उनके बहकावे में आ गए। इस तरह की ज्यादातर वारदातें ऑनलाइन शॉपिंग साइट पर सेकेंड हैंड वाहन खरीदने या बेचने का झांसा देकर हुई हैं। कुछ वारदातों में झांसा देने के लिए टीवी, एलईडी सहित अन्य सामान खरीदने या बेचने का झांसा दिया गया। इन मामलों में साइबर अपराध शाखा ने जांच के बाद विभिन्न थानों में मुकदमे भी दर्ज कराए हैं। अभी तक इस तरह ठगी करने वाला काेई गिरोह हत्थे नहीं चढ़ा है। लोगों के दिलों में सेना के प्रति सम्मान व विश्वास है। सेना या उसके अधिकारियों का नाम सामने आने पर लोग आसानी से विश्वास कर लेते हैं। साइबर ठग इसी का फायदा
उठाते हैं।

इस तरह करते हैं ठगी: साइबर ठग सेकेंड हैंड वाहन या इलेक्ट्रॉनिक सामान का विज्ञापन ऑनलाइन शॉपिंग साइट पर डालते हैं। उसकी कीमत ऐसी रखते हैं कि लोग तुरंत आकर्षित हो जाते हैं और दिए गए नंबर पर कॉल कर देते हैं। कॉल उठाने वाला खुद को सैन्य अधिकारी बताता है और कहता है कि वाहन का ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया है। इन दिनों ड्यूटी दूर-दराज के इलाकों में है, इसलिए सस्ते में बेचना चाहता है। लोग झांसे में आकर वाहन की कीमत ई-वॉलेट या ई-बैंकिंग से कर देते हैं। इसके बाद ना वाहन आता है ना ही रुपये वापस। कुछ मामलों में वाहन खरीदने का झांसा देकर भी ठगी होती है। इसमें साइबर ठग आनलाइन शॉपिंग साइट पर विक्रेता को कॉल कर सामान खरीदने की इच्छा जाहिर करते हैं। इसके बाद भुगतान करने की बात कहकर एक लिंक विक्रेता को भेजते हैं। उस लिंक पर क्लिक करते ही विक्रेता के खाते से रुपये साफ हो जाते हैं।

इन बदमाशों को पकड़ना टेढ़ी खीर :

साइबर अपराध शाखा की जांच में सामने आया है कि इन ठगों को पकड़ना टेढ़ी खीर है। लोगों द्वारा दिए गए साइबर ठगों के मोबाइल नंबर साइबर अपराध शाखा ने ट्रेस किए तो पता चला कि वे देश के दुर्गम इलाकों में बैठकर ठगी कर रहे हैं। जहां तक पहुंचना पुलिस के लिए आसान नहीं। साइबर ठगों की लोकेशन सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में मिलती है।

केस 1 : गांव तिगांव निवासी अजय ने ऑनलाइन शाॅपिंग साइट पर सेकेंड हैंड कार का विज्ञापन देखा। कार बेचने वाले को कॉल की तो उसने खुद को सेना का अधिकारी बताया। कुछ दिन में कार भिजवाने की बात कहकर अजय से 95 हजार रुपये अपने खाते में डलवा लिए।

केस 2 : डबुआ कॉलोनी निवासी अभिषेक ने ऑनलाइन शॉपिंग साइट पर पुराना टीवी बेचने का विज्ञापन डाला था। साइबर ठगों ने खुद को सैन्य अधिकारी बताकर टीवी खरीदने का झांसा दिया और रकम खाते में भेजने के बहाने अभिषेक से 48 हजार रुपये ठगे।

क्या कहते है साइबर थाना प्रभारी

साइबर ठग खुद को सैन्य अधिकारी बताकर लोगों को शिकार बना रहे हैं। इससे संबंधित शिकायतें भी हमारे पास पहुंची है। इन ठगों के पीछे हमारी टीमें काफी मेहनत कर रही हैं। मामले जल्द सुलझा लिए जाएंगे। –इंस्पेक्टर बसंत कुमार, प्रभारी, साइबर अपराध शाखा