मौत के मुँह में फरीदाबाद, फिर भी लोग बेपरवाह

News24ncr/Faridabad: लगातार बढ़ते जा रहे कोरोना के मामलो से एक बार फिर फरीदाबाद के लोगो में भय का माहौल देखा जा रहा है, एक बार फिर हम इसलिए कह रहे है क्यूंकि बीते दिनों लोग जिस तरह से कोरोना को लेकर बेपरवाह होते नजर आये थे अब उसका उल्टा उनके चेहरे के भाव बदल गए ह। लेकिन पहले लोगो की लापरवाही और अब मजबूरी उनको घरों में टिकने नहीं दे रही है, क्यूंकि इस महामारी ने लोगो की जमापूंजी समाप्त कर दी है, और लोगो के लिए गुजर बसर करना बहुत मुश्किल हो गया ह।

इसके साथ ही सरकार के परीक्षा के फैसले ने भी लोगो को परेशान कर दिया है, वैसे तो यह फैसला बच्चो के बेहतर भविष्य को लेकर जरूरी था, लेकिन जिस प्रकार शहर व् देश में महामारी भयानक रूप लेती जा रही है उस से लोगो को यह फैसला ख़ासा रास नहीं आ रहा है। आज पूरे क्षेत्र में कोरोना महामारी ने बीमार लोगो की झड़ी लगा दी है। हर तरफ बस मरीज़ ही मरीज़ हैं और मुश्किलों का अम्बार लगा हुआ है। इन मुश्किलों के बीच सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया। क्षेत्र के छोटे छोटे बच्चों को मौत के मुँह में धकेलने का फैसला।

आपको बताते चले कि, पिछले 24 घंटों में 281 नए कोरोना मामलो ने शहर के लोगो कि चिटा बढ़ा दी है उस से पहले भी यह आंकड़ा 200 के पार पंहुचा हुआ था। इसका कारण जानते हैं आप? इसके पीछे की वजह है बिना सोचे समझे तैश में लिए गए फैसले। सरकार के आदेश अनुसार मेरे क्षेत्र में भी प्रवेश परीक्षाएं करवाई गईं और उन परीक्षाओं के परिणाम स्वरुप हमे कोरोना के नए मरीज मिले।

भोले भाले लोग नहीं जानते कि यह फैसला सही था या फिर गलत पर ये जरूर मान रहे है कि शहर में और अधिक संक्रमितों के मिलने के पीछे सरकार के इस फैसले का हाथ है। पर दोष सिर्फ प्रशासन के मत्थे नहीं मढ़ा जा सकता, क्यूंकि लोग बिना कारण भी घरो से बहार तो निकल ही रहे है वरन सामाजिक दूरी का खंडन भी करते हैं, अधिकांश लोग मास्क पहनना भूल जाते है या तैश में आ कर मास्क को या तो जेब में रख लेते है या फिर नाक से नीचे सरका लेते है। ऐसे में संक्रमण तो फैलेगा ही। लोग कब समझेंगे कि एक हाथ की दूरी अभी भी है जरूरी।