मिट्टी के दिए करेंगे दिवाली को रोशन, लोगों ने चाइनीज लाइटों को कहा ना…..

News24ncr/Faridabad: महामारी और चीन के साथ विवाद का असर इस बार दिवाली पर दिखने को मिल रहा है। चीनी लाइटों की जगह अबकी दीयों की बाजार में ज्यादा डिमांड है। लोकल फॉर वोकल के तहत मिट्टी से बने तरह-तरह के आइटम बाजारों में धूम मचाए हुए हैं। सराय ख्वाजा, ओल्ड फरीदाबाद, एनआईटी, बल्लभगढ़, तिगांव व अन्य बाजारों में मिट्टी से बने दीये, मंदिर, चौकड़ा, फैंसी दीये व अन्य सामान लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।

फरीदाबाद: चीनी लाइटों की जगह अबकी मिट्टी के दीयों से रोशन होगी दिवाली

फरीदाबाद में चीनी लाइटों की जगह अबकी मिट्टी के दीयों से रोशन होगी दिवाली

ओल्ड फरीदाबाद में संतरा, गीता व गोपाल मिट्टी से बने सामान बेच रहे हैं। जिसे उन्होंने खुद तैयार किया है। संतरा व गीता कहती हैं कि पहले लोग चीन से सस्ते दामों में आए आइटम खरीदते थे, लेकिन अब प्रधानमंत्री के स्वदेशी के नारे का असर दिख रहा है। लोग उनके हाथों से बने सामान खूब खरीद रहे हैं। उन्होंने बताया कि मिट्टी से साधारण व फैंसी दीये, मंदिर व चौकड़ा समेत अन्य आइटम तैयार किए हैं। साधारण दीये 10 रुपये दर्जन बिक रहे हैं। बेहतर गुणवत्ता वाले दीये 20 रुपये दर्जन हैं। फैंसी दीया 5 से 10 रुपये प्रति पीस हैं। खूबसूरत मंदिर 80 से 150 रुपये तक में बिक रहे हैं। चीनी सामान के चलते मंद हुआ दीये बनाने का परंपरागत काम अब फिर से तेजी पकड़ चुका है।

आत्मनिर्भर बनाने के लिए उठाया कदम
मिशन जागृति आत्मनिर्भर केंद्र ने प्रधानमंत्री के लोकल फॉर वोकल के नारे से सीख लेते हुए छात्राएं व महिलाओं को दीये बनाने का प्रशिक्षण देना शुरू किया है। इनके बनाए दीयों की प्रदर्शनी गुरुवार को त्रिखा कॉलोनी स्थित केंद्र में लगाई जाएगी। केंद्र की संयोजिका सुनीता रानी, पेंटिंग कलाकार लता सिंगला, शुभानिगी, अरुणा व भावना महिला व छात्राओं को आत्मनिर्भरता के गुर सिखा रही हैं। संस्था के फाउंडर प्रवेश मलिक कहते हैं कि महिलाओं को फ्री में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।