बिग ब्रेकिंग: फरीदाबाद के बीके अस्पताल का नाम बदल कर, अटल बिहारी अस्पताल किया गया

News24NCR/SandeepGathwal: बाबा फरीद की नगरिया के लोगों को बादशाह खान अस्पताल का नाम बदलना रास नहीं आ रहा। आम समझ है कि सरकार के ऐसे प्रयासों से नई पीढ़ी अपने पूर्वजों को तो बिसरा ही देगी, देश को गौरवान्वित करने वाली निशानियां भी समाप्त हो जाएंगी। लोग कहते हैं सरकार काम करें, नाम न बदलें। यह पहल कुछ ठीक नहीं। बता दें कि प्रदेश के प्रमुख शहरों में शुमार औद्योगिक नगरी फरीदाबाद को 1607 ई. में सूफी संत शेख फरीद, जहांगीर के खजांची ने बसाया था। 15 अगस्त 1979 में यह हरियाणा का 12वां जिला बना।

इस औद्योगिक नगरी में भारत-पाक बटवारे के दौरान पाकिस्तानी शरणार्थी यहां बसाए गए। शरणार्थियों के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने महात्मा गांधी के मित्र और बादशाह खान से चर्चित खान अब्दुल गफ्फार के नाम पर पांच जून 1951 को बादशाह खान अस्पताल बनवाया था।

अफगानिस्तान में बादशाह खान को सीमांत गांधी के नाम से भी जाना जाता है। निर्माण के बाद से यह अस्पताल इसी नाम से जाना जाता था। सत्तारूढ़ भाजपा अपने शासन में अस्पताल के वास्तविक नाम में कई बार बदलाव कर चुकी है। सरकार की इस पहल को शहर के लोग सही नहीं मानते, इसलिए इसको लेकर गाहे-बगाहे विरोध भी होता रहता है।

फरीदाबाद वासियों की समझ है कि आज भी सीमांत गांधी प्रासंगिक हैं। इसलिए बादशाह खान या बीके सिविल अस्पताल का नाम नहीं बदलना चाहिए। वैसे, सरकार एक खास रणनीति के तहत इसका नाम बदलकर नागरिक सिविल अस्पताल कर चुकी है।

बल्लभगढ़ का नाम किया था बलरामगढ़
मुख्यमंत्री मनोहरलाल की पहल पर छह फरवरी 2016 को बल्लभगढ़ का नाम बदलकर बलरामगढ़ किया जा चुका है। यह अलग बात है कि शहरवासियों के विरोध को देखते हुए बल्लभगढ़ का नाम नहीं बदला गया। वाईएमसीए कॉलेज का नाम बदलकर वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बासू के नाम पर रखा जा चुका है।

सरकार के आदेश पर बदला नाम
बीके सिविल अस्पताल के सीएमओ ने इस बारे में नोटिफ़िकेशन जारी कर बताया है कि बादशाह खान अस्पताल का नाम बदल कर अटल बिहारी अस्पताल कर दिया गया है। सरकार के निर्देशों के मुताबिक नाम बदला जा रहा है। सर्वप्रथम इसका नाम बादशाह खान अस्पताल था। सरकार ने अब यह बीके सिविल अस्पताल से बदल कर अटल बिहारी अस्पताल कर दिया है।

कांग्रेस प्रवक्ता जितेंद्र चंदेलिया का कहना है बादशाह खान अस्पताल का नाम बदलना पूरी तरह गलत है। अस्पताल के नाम से बीके चौक भी प्रसिद्ध है। यदि सरकार इसी तरह महापुरूषों के नाम पर बने संस्थानों के नाम बदलती रही तो आने वाले समय में लोग इन्हें भूल जाएंगे। सरकार को नाम बदलने के बजाय, बीके चौक पर बादशाह खान की एक प्रतिमा भी लगवानी चाहिए।