फरीदाबाद में सुसाइड प्वाइंट बनते जा रहे OYO HOTEL, प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान

News24ncr/Faridabad: फरीदाबाद के गेस्ट हाउस अब गेस्ट हाउस कम सुसाइड प्वाइंट ज्यादा लगने लगे है। इन गेस्ट हाउस में आये दिन मौतों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। बीते शुक्रवार को ओल्ड फरीदाबाद राजीव चौक के पास हाईवे किनारे स्थित मून वैली गेस्ट हाउस में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गयी। गेस्ट हाउस में युवक द्वारा दिए आधार कार्ड के अनुसार 25 वर्षीय विशाल झा नंगला एन्क्लेव पार्ट-2 का निवासी था। फिलहाल युवक की मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस मामले की जाँच में जुटी है।

दरअसल, मिली जानकरी के अनुसार मृतक विशाल ने गेस्ट हाउस में शुक्रवार सुबह कमरा बुक किया था और उसके साथ मोलड़बंध की एक युवती भी थी। दोपहर 3 बजे युवती कमरे से चीखती हुई बाहर आई और संचालकों को बताया कि विशाल ने फांसी लगा ली है। सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस पहुंची और शव को कब्जे में ले लिया। पुलिस द्वारा पूछताछ में युवती ने बताया कि वह बाथरूम गयी थी जब बाहर निकली तो विशाल पंखे से लटका था। आपको बता दे कि जब पुलिस विशाल के पास पहुंची तो विशाल ने युवती की चुन्नी से फांसी लगाई थी और उसके घुटने बेड पर टीके थे। पुलिस को यह हत्या लग रही है और इस घटना में किसी तीसरे व्यक्ति के संलिप्त होने की भी आशंका है। फिलहाल पुलिस गेस्ट हाउस की सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। मिलीजानकारी के अनुसार पुलिस ने युवक के परिजनों को सूचित कर दिया है। उनकी शिकायत के आधार पर आगे की कार्यवाही होगी।

इससे पहले भी कई लोगो ने आत्महत्या के लिए चुना गेस्ट हाउस 
जिले में गेस्ट हाउस में आत्महत्या करने का ये कोई पहला मामला नहीं है इससे पहले भी कई लोग गेस्ट हाउस में फांसी लगा चुके है। इसके अलावा 29 जनवरी को एनआईटी में बाटा चौक के पास गेस्ट हाउस में 18 वर्षीय हर्ष बजाज ने आत्महत्या कर ली थी। इसके अलावा 17 जनवरी को सेक्टर 31 स्थित गेस्ट हाउस में आईपी कॉलोनी निवासी आरके सिंह ने आत्महत्या की थी। 27 जुलाई 2020 को सेक्टर-7-10 चौक स्थित गेस्ट हाउस में हरिवंश नाम के एक युवक ने आत्महत्या कर ली थी। 20 फरवरी 2020 को नीलम बाटा रोड स्थित गेस्ट हाउस में सेक्टर- 7 निवासी अतुल नाम के एक कारोबारी ने आत्महत्या कर ली थी। इसके अलावा 30 अगस्त 2019 को एनआईटी-5 स्थित एक गेस्ट हाउस में दंपति ने आत्महत्या कर ली थी।

प्रशासन की नाक के नीचे ऐसे चल रहे गेस्ट हाउस
दरअसल, जिले के गेस्ट हाउसों में मौतों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में सोचने वाली बात ये है कि गेस्ट हाउस की व्यवस्था कैसी है। आपको बता दे कि ऐप आधारित कंपनियां बिना कुछ सोचे समझे नियमों को ताक पर रखकर गेस्ट हाउस चला रही है। गेस्ट हाउस को चलाने से पहले निगम से ट्रेड लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है इसमें निगम पूरे साल की फीस लेता है। इसके साथ ही श्रम विभाग से एक सर्टिफिकेट लेना होता है जो कि हर तीन साल में रिन्यू होता है। इसमें गेस्ट हाउस कर्मियों की पूरी जानकारी होती है।

इसके अलावा गेस्ट हाउस के रजिस्टर में आने वालो का ब्यौरा होता है और 18 से कम आयु वाले को कमरा नहीं दिया जा सकता। आपको बता दे कि जिले में लगभग 500 गेस्ट हाउस चल रहे है। इनमे से अधिकतर गेस्ट हाउस ऐप बेस्ड कंपनी से करार कर लेते है। इन गेस्ट हाउस में कंपनी ग्राहक भेजती है और कमीशन लेती है। ऐसे में इनके पास न तो वैध प्रमाण पत्र होता है और न ही लाइसेंस। ऐसे में प्रशासन के नाक के निचे चल रहे ये गेस्ट हाउस लोगो के आत्महत्या का गढ़ बनते जा रहे है। प्रशासन को अवैध रूप से चल रहे गेस्ट हाउस पर रोक और 18 वर्ष से कम आयु को कमरा देने वालों के खिलाफ कार्यवाही करने की आवश्यकता है।