फरीदाबाद में अनुभवहीन सब-इंस्पेक्टर सम्भाल रहे क्राइम ब्रांच की कमान? विकास दुबे प्रकरण में हाथ से निकल गया था गेंगस्टर

– विकास दुबे प्रकरण के बाद की जा रही क्राइम ब्रांचों में परिवर्तन की जरूरत
– कई क्राइम ब्रांचों में तैनात हैं कम अनुभवी कर्मी

News24NCR/Faridabad: विकास दुबे प्रकरण के बाद जिले की क्राइम ब्रांच में आमुल-चूल परिर्वतन की आवश्यकता महसूस की जा रही है। बीपीटीपी क्राइम ब्रांच की अनुभवहीनता के कारण विकास दुबे फरीदाबाद पुलिस के हाथ से फिसल गया। यह इकलौती बीपीटीपी क्राइम ब्रांच की समस्या नहीं है। जिले में फेहरिस्त लंबी है, जिनमें अनुभवहीन लोगों को क्राइम ब्रांच, थाना या चौकियों में अहम प्रभार दिया गया है। उम्मीद की जाती है कि बेहद मझे और तेज-तर्रार कर्मियों को ही क्राइम ब्रांच में नियुक्ति दी जाए। जरूरत पड़ने पर वे तेजी से निर्णय लेने में सक्षम हों।

आपराधिक मामलों को सुलझाने का उन्हें अनुभव व बारीक नजर हो। इसके उलट कई क्राइम ब्रांचों में ऐसे कर्मियों को अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं, जिनका क्राइम ब्रांच का पुराना अनुभव ही नहीं। जिले में इंस्पेक्टरों की कमी नहीं है। इस समय जिले में करीब 80 इंस्पेक्टर हैं। इसके बावजूद कई क्राइम ब्रांचाें में सब इंस्पेक्टर रैंक के कर्मी प्रभारी लगे हुए हैं। सेवानिवृत डीजीपी डॉ. केपी सिंह का कहना है कि एसआइ रैंक के कर्मी एसीपी-डीसीपी रैंक के अधिकारियों से बात करने में झिझकते हैं। इस कारण कई बार महत्वपूर्ण मामलों में उच्च अधिकारियों को समय पर सूचना नहीं मिल पाती, जिसका नुकसान होता है।

तैनाती में होता है खेल :
पुलिस आयुक्त कार्यालय की ओएसआइ ब्रांच यह तय करती है कि किस पुलिसकर्मी को कहां तैनाती देनी है। बेहतर जगह पर पोस्टिंग की चाह रखने वाले कर्मी ओएसआइ ब्रांच में जुगाड़ बिठा लेते हैं। इस तरह कम अनुभवी कर्मी जिम्मेदारी वाली जगहों पर तैनाती पा जाते हैं। जरूरत पड़ने पर वे पूरी पुलिस पर सवालिया निशान भी लगवा देते हैं। इन्हीं कारणों से महकमे के
अंदर ओएसआइ ब्रांच सुर्खियों में रहती है।

कई साल से नहीं है स्थाई डीसीपी क्राइम :
जिले में कई साल से स्थाई डीसीपी क्राइम की नियुक्ति नहीं है। इस वक्त डीसीपी बल्लभगढ़ मकसूद अहमद क्राइम का भी प्रभार संभाल रहे हैं। उनसे पहले लोकेंद्र सिंह डीसीपी सेंट्रल रहते हुए क्राइम का प्रभार संभाल रहे थे। स्थाई डीसीपी ना होने के कारण एसीपी क्राइम के कंधों पर पूरी क्राइम ब्रांच की जिम्मेदार आ जाती है। अगर स्थाई डीसीपी क्राइम की नियुक्ति हो जाए क्राइम ब्रांचों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। वे और भी बेहतर तरीके से काम कर पाएंगी।