फरीदाबाद: तेंदुओं के साथ-साथ 219 तरह के पक्षियों का घर भी है अरावली कि पहाड़ियाँ

News24ncr/Faridabad: एक साल तक किये गए सर्वे के बाद सामने आए नतीजों में पता लगा है कि अरावली में 219 प्रजातियों के पक्षी रहते हैं। इनमें कई दुर्लभ व लुप्तप्राय प्रजातियों के पक्षी भी शामिल हैं। यह दावा पर्यावरण प्रभावों और वन्य संरक्षण पर अध्ययन करने वाली सेंटर फार इकोलोजी डेवलपमेंट एंड रिसर्च संस्था ने अपनी सर्वे रिपोर्ट में किया है। संस्था ने करीब एक साल तक इस क्षेत्र का सर्वे कराया था। अब सर्वे की अंतिम रिपोर्ट वन्य प्राणी विभाग हरियाणा को भेजी गई है। संस्था का दावा है कि इस क्षेत्र में पक्षी विविधता को सुव्यवस्थित तरीके से इंगित करने के लिए यह पहला सर्वे है। सर्वे वरिष्ठ जीव वैज्ञानिक गजाला शहाबुद्दीन के नेतृत्व में पक्षी विशेषज्ञ मीशा बंसल और स्थानीय शोधकर्ता सुनील हरसाना ने किया।

पक्षियों की छह दुर्लभ प्रजातियां मिलीं :
वरिष्ठ जीव वैज्ञानिक गजाला शहाबुद्दीन ने बताया कि सर्वे में राष्ट्रीय स्तर पर दुर्लभ घोषित छह प्रजातियों की उपस्थिति भी मांगर बनी में मिली। इसमें छोटा राजालाल (स्माल मिनिवेट), बादामी माथावाली दुमफुदकी (रूफस फ्रंटेड प्रीनिया), तरती टूइया (कोमन वुडश्राईक), मराठा कठफोडा (येलो क्राउन वुडपैकर), सांपमार (शार्ट टोयड स्नेक ईगल) और सरकीर मालकोहा (सरकीर मालकोहा) शामिल हैं। इनके अलावा लुप्तप्राय शिकारी पक्षियों में सफेद गिद्ध (इजिप्शन वल्चर), राज गिद्ध (रेड हेडेड वल्चर), रगड उकाब (स्टेपी ईगल), कपासी चील, फुर्जबाज (क्रेस्टेड सर्फेंट ईगल) और छोटा खैरमुतिया (लैशर कैस्पाट्रल) पाए गए। पक्षियों की 26 ऐसी प्रजातियां भी दर्ज की गई जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में केवल चुनिंदा जगहें जहां कुछ जंगलों के अवशेष बचे हुए है पर ही दिखाई देते है। इनमें भूरे सिर वाला छोटा कठफोडा (ब्राउन कैप्ड पिग्मी वुडपैकर), नवरंग (इंडियन पिट्टा) सलेटी रामगंगरा (सिनेरियस टिट), भूरा मछरिया (एशियन ब्राउन फलाईकैचर), नाचन (व्हाइट ब्रौड फैनटेल), जंगली दुमफुदकी (जंगल प्रीनिया), सफेद पेट वाला भुजंग (व्हाइट बैलीड ड्रोंगो), दूधराज (एशियन पैराडाईस फ्लाईकैचर), टिकेल मछरिया (टिकेल ब्ल्यू फलाईकैचर) शामिल हैं। स्थानीय शोधकर्ता सुनील हरसाना ने बताया कि मांगर बनी दिल्ली-एनसीआर का एकमात्र सघन वन क्षेत्र बचा है। यहां जैव विविधता का भंडार है। यह अध्ययन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए भविष्य में जैव विविधता संरक्षण और संवेदनशील भूमि-उपयोग के लिए योजना बनाने में बहुत मददगार साबित होगा। सर्वे में मांगर बनी का 17.12 वर्ग किलोमीटर का दायरा शामिल किया गया। इसमें मांगर, मोहब्ताबाद, कोट, बंधवाडी और रोजका गुर्जर का क्षेत्र शामिल किया।