प्राइवेट अस्पताल का कारनामा, पुरुष की मौत होने पर परिजनों को सौंप दिया महिला का शव।

News24NCR/Faridabad: फ़रीदाबाद के सेक्टर-21 स्थित एक बड़े प्राइवेट अस्पताल प्रबंधन ने लापरवाही से पुरुष के परिजनों को महिला का शव दे दिया। जब अंतिम संस्कार के लिए चेहरे से कपड़ा हटाया गया तो परिजनों के पैरों तले से जमीन खिसक गई। अस्पताल प्रबंधन से संपर्क किया तो उन्होंने शव बदले जाने की गलती स्वीकार की। एंबुलेंस भेजकर श्मशान घाट से महिला का शव वापस मंगवाया गया और सही शव भेजा गया। पुलिस का कहना है कि अभी परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ शव बदलने से संबंधित शिकायत नहीं दी है। पल्ला निवासी रोहित ने बताया कि उनके पिता किशोर गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। 7 जुलाई को इन्हें ईएसआइसी मेडिकल कॉलेज से निजी अस्पताल रेफर किया गया था। रविवार तड़के साढ़े 4 बजे करीब अस्पताल प्रबंधन ने किशोर की मौत की पुष्टि की।

रविवार सुबह जब रोहित व अन्य स्वजन अस्पताल शव लेने पहुंचे। रोहित ने चेहरा दिखाने के लिए कहा, लेकिन अस्पताल कर्मियों ने कोरोना के संक्रमण का हवाला देते हुए शव का चेहरा दिखाने से इंकार कर दिया। वे शव लेकर अस्पताल से सेक्टर-37 श्मशान घाट पहुंचे। परिवार के बाकी सदस्य और संबंधी सीधे वहीं पहुंच गए। अंतिम संस्कार से पूर्व पंडित ने मुंह जल डालने के लिए शव के चेहरे से कपड़ा हटवाया। तब महिला का शव देखकर स्वजन घबरा गए और अंतिम संस्कार की क्रियाएं रोक दीं। रोहित ने पुलिस कंट्रोल रूम को भी सूचना दे दी। हंगामे की आशंका के चलते पल्ला थाने से पुलिस श्मशान घाट पहुंच गई।

अस्पताल प्रबंधन की तरफ से किशोर का शव श्मशान घाट भेजा गया, तब उन्होंने अंतिम संस्कार किया। इधर, जिस महिला का शव बदला गया था, उसके स्वजन भी अस्पताल
पहुंच गए थे। अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें किसी तरह समझाकर शव सौंपा। रोहित का कहना है कि उपचार के दौरान 22 लाख रुपये का खर्च आया था, जिसका भुगतान ईएसआइसी से हुआ है। शनिवार को किशोर की तबियत अचानक खराब हो गई थी और अस्पताल प्रबंधन ने किशोर को वेंटिलेटर पर रखने के लिए रोहित से दो लाख रुपये का इंतजाम करने के लिए कहा था। रोहित ने दो लाख रुपये का इंतजाम करने के लिए अस्पताल से थोड़ा समय मांगा था। उनका कहना है कि उन्हें अस्पताल से कुछ नहीं चाहिए, लेकिन किसी अन्य मरीज के स्वजनों के साथ ऐसा न हो। इसके चलते अस्पताल पर कार्रवाई होनी चाहिए।

परिजनों की तरफ से अभी शिकायत नहीं मिली है। अगर शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी। – एसीपी धारणा यादव, पीआरओ पुलिस

इससे पहले बादशाह खान अस्पताल प्रबंधन भी शव बदलने का कारनामा कर चुका है। 21 जून को हत्या के मामले में पोस्टमॉर्टम के लिए लाए गए बल्लभगढ़ निवासी सोनू खान का शव कोरोना से मौत समझकर बिना पोस्टमॉर्टम अंतिम संस्कार करा दिया गया था। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ लापरवाही का मुकदमा भी दर्ज हुआ था। जिसकी अभी जांच चल रही है।