कोरोना काल में जन्म लेने वाले बच्चों पर रिसर्च करेगा NIT-3 स्थित ESI मेडिकल कॉलेज, 45 देशों की कॉन्फ्रेंस में लिया था हिस्सा

News24NCR/Faridabad: ईएसआइसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल कोरोना काल में होने वाले नवजातों पर
अनुसंधान करेगी। अनुसंधान में कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से नवजात में होने वाले बदलावों पर निगरानी रखी जाएगी। इसे लेकर ईएसआइसी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन सहित 45 देशों की कॉन्फ्रेंस हुई थी। अनुसंधान में ईएसआइसी मेडिकल कॉलेज के अलावा दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल, आरएमएल अस्पताल और सिविल अस्पताल गुरुग्राम को शामिल किया गया है। इसमें ईएसआइसी मेडिकल कॉलेज बादशाह खान नागरिक अस्पताल का भी सहयोग लेगा।

वैश्विक महामारी के काल में गर्भवती के साथ उनके नवजात भी कोरोना का संक्रमण पाया जा रहा है। कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से नवजात में कई तरह के बदलाव एवं दुष्प्रभाव की आशंका है। इन सभी का पहलुओं का पता लगाने
के लिए ईएसआइसी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन अपने यहां होने वाली 150 कोरोना संक्रमित डिलीवरी और नागरिक अस्पताल से उन 300 डिलीवरी को शामिल करेगा, जिनमें कोरोना का संक्रमण नहीं पाया गया है। अनुसंधान के लिए प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. सविता यादव ने सहमति भी जताई है।

छह महीने तक रखी जाएगी निगरानी
ईएसआइसी मेडिकल कॉलेज से प्राप्त जानकारी के अनुसार अनुसंधान में शामिल की जाने वाले 450 महिलाओं एवं उनके नवजात पर छह महीने तक निगरानी रखी जाएगी। ईएसआइसी मेडिकल कॉलेज की टीम हर प्रत्येक महीने संबंधित महिला के
घर जाकर हालचाल लेगी और महिला एवं नवजात दोनों के ब्लड सैंपल भी एकत्र करेगी। अधिकारियों के अनुसार कोरोना संक्रमित नवजात में शारीरिक, मानसिक, रोग प्रतिरोध क्षमता सहित कई चीजों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, ईएसआइसी मेडिकल कॉलेज के अलावा एलएनजेपी, आरएमएल और नागरिक अस्पताल गुरुग्राम एक-दूसरे के साथ अपनी रिपोर्ट सांझा करेंगे। इसके आधार की अनुसंधान की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यह रिपोर्ट विश्व के अन्य देशों के साथ सांझा की जाएगी। सभी 45 देशों की रिपोर्ट एकत्र होने के बाद, जो निष्कर्ष निकलेगा, वह अनुसंधान का हिस्सा होगा।

भारत से ईएसआइसी मेडिकल काॅलेज के अलावा एलएनजेपी, आएमएल व नागरिक अस्पताल गुरुग्राम को संक्रमित गर्भवती एवं उनके नवजात पर होने वाले अनुसंधान में शामिल किया गया है। इससे कोरोना के संक्रमण की वजह से होने वाले बदलावों का पता लगाने की कोशिश की जाएगी।
डॉ. एके पांडे, डिप्टी डीन, ईएसआइसी मेडिकल कॉलेज