अलविदा कर गए जमाने को, जो कहते थे किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है।

News24NCR/Delhi: मशहूर शायर राहत इंदौरी का निधन हो गया है। वे कोरोना वायरस से संक्रमित थे। मंगलवार सुबह ही उन्होंने ट्वीट कर कोरोना वायरस से संक्रमित होने की खबर दी थी।

राहत इंदौरी तारीखी शायर थे। देश ही नहीं पूरी दुनिया में अपने अंदाज के साथ शायरी कहने वाले राहत इंदौरी हर दिल अजीज थे। इस शेर के लिए उन्हें काफी मकबूलियत मिली, सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है।

मुशायरों में उनका हर लफ्ज न सिर्फ तालियां बटोरता था, बल्कि उनके अंदाज पर भी लोग ला जवाब हो जाते थे। शायरी की दुनिया के चमकते सितारे राहत इंदौरी ने कई तरह की शायरी की।

गजल, नज्में पढ़ीं, जो खूब मशहूर हुईं। वहीं, राहत इंदौरी ने कुछ ऐसा भी रचा, जिसमें चुनौती भी है और चुनौती बनकर टकराने का माद्दा भी।

‘किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है’ राहत इंदौरी की ऐसी ही गजल है, जो पैगाम भी बन चुकी है।

ये गजल न सिर्फ लोकप्रिय हुई, बल्कि आंदोलनों में लोगों द्वारा अपनी बात कहने का जरिया भी बना ली गई।

‘किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है’

अगर खिलाफ हैं, होने दो, जान थोड़ी है
ये सब धुँआ है, कोई आसमान थोड़ी है।

लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में,
यहाँ पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है।

मैं जानता हूँ कि दुश्मन भी कम नहीं लेकिन,
हमारी तरह हथेली पे जान थोड़ी है।

हमारे मुंह से जो निकले वही सदाकत है,
हमारे मुंह में तुम्हारी जुबान थोड़ी है।

जो आज साहिब-इ-मसनद हैं कल नहीं होंगे,
किराएदार हैं जाती मकान थोड़ी है।

सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में,
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है।