अपनी माँ व नाना को बनाया पहले गुरु: बल्लभगढ़ एस.डी.एम. अपराजिता

News24NCR/Faridabad: कहते हैं हर कामयाब आदमी के पीछे एक औरत का हाथ होता है लेकिन शहर की उपमंडल अधिकारी के आईएएस बनने तक के सफर में उनके नाना का हाथ रहा। मां को पहला गुरु कहा जाता है लेकिन अपराजिता के नाना यहां भी बाजी मार गए। वही उनके पहले गुरु बने और उन्हें कलम पकड़ना सिखाया इतना ही नही उनके लिखे नोट्स को पढ़कर ही अपराजिता ने अपनी इतिहास की परीक्षा उतीर्ण की। हम बात कर रहे हैं शहर की उपमंडल अधिकारी की जो आईएएस हैं और ट्रेनिंग के बाद पहला पद उन्होंने शहर में संभाला है।

उपमंडल अधिकारी ने बताया कि उनका जन्म उत्तरप्रदेश के बनारस में हुआ और उनका ननिहाल भी बनारस में ही था। बचपन से ही उनका लगाव अपने नाना स्वर्गीय गौरीशंकर के साथ ज्यादा था। उन्होंने बताया कि उनके नाना पहले सेना में थे वहां से सेवनिर्वित होकर उन्होंने अध्यापक की नोकरी की और कई साल यूनिवर्सिटी में पढ़ाया। उन्होंने इतिहास व राजनीति शास्त्र में एम.ए. तक पढ़ाई की हुई थी। अपराजिता कहती हैं कि उनके नाना ने ही सबसे पहले उन्हें कलम पकड़ना सिखाया। राजनीति पर लिखे उनके नोट्स पढ़कर ही उन्होंने अपनी परीक्षा भी पास की।

उनकी दूसरी गुरु उनकी माँ विजयालक्ष्मी थी वह एक युनिवेर्सिटी में अध्यापक थी और हड़प्पा संस्कृति में उन्होंने काफी शोध किया था। अपनी माँ के हरियाणा पर किये किये शोध को पढ़कर ही उन्होंने इस राज्य के बारे में जाना है। वह कहती हैं कि अब उनका सौभाग्य है कि उन्हें हरियाणा कैडर मिला अब वह किताबों में पढ़े इलाकों , शहर व यहां के गांवों को जाकर करीब से देखना चाहती हैं। अपराजिता अपने माता पिता की इकलौती संतान हैं और उनके पिता मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर हैं और अपने विद्यार्थियों को इसके बारे में पढ़ाते भी हैं। उनकी मौसी भी अध्यापक हैं। उनका सारा आसपास का माहौल शिक्षकों से ही भरा हुआ रहा है। इसलिए अध्यापन को वह सबसे अच्छा कार्य भी मानती हैं।